बीते विधान सभा चुनावों के बाद यह पहला अवसर है जब इस ब्लॉग के माध्यम से मैं अपने विचार आपसे साझा कर रहा हूँ ।
सबसे पहले बिहारवासियों को धन्यवाद देना चाहूँगा, जिन्होंने हमारी सरकार को खुले दिल से बेमिसाल समर्थन दिया और अपनी निष्ठा व्यक्त की ।
बिगत कुछ महिनों में दुनियॉं के विभिन्न कोने से लोगों ने यह जिज्ञासा प्रकट की मैंने ब्लॉग लेखन को विराम क्यों दे दिया । दरअसल मैंने ब्लॉग लिखना बंद नहीं किया था । मैं तो उस महत्वपूर्ण क्षण का इंतजार कर रहा था जब किसी ठोस मुद्दा और विषय के साथ आपके समक्ष आऊं । मैं समझता हूँ वह मौका आ गया है ।
बिगत सप्ताह हमारी सरकार ने एक ऐसे मुकाम को हासिल किया जिसके लिये में मैं प्रतिबद्व था । हमारी सरकार ने एक ऐसे वरीय लोक सेवक के घर में एक प्राथमिक विद्यालय की शुरूआत की, जिनपर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मुकदमा चल रहा है । हमारी सरकार ने उक्त भवन में उस प्राथमिक विद्यालय का स्थानांतरण किया जहॉं गरीब एवं वंचित समाज के बच्चे पढ़ते थे ।
इस भवन का बिहार विशेष न्यायालय कानून के अंतर्गत अधिग्रहण किया गया था जिसे हमारी सरकार ने पिछले वर्ष से लागू किया था । इस भवन को पटना जिला प्रशासन ने विशेष न्यायालय जो भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की सुनवाई कर रही है, के निर्देश पर हाल ही में जब्त किया है और इसे मानव संसाधन विभाग को सुर्पुद किया गया जिसने अल्प अवधि में ही वहॉं प्राथिमक विद्यालय की शुरूआत की ।
इस कानून के अंतर्गत संबंधित प्राधिकार को यह अधिकार है कि वह किसी ऐसे लोक सेवक की चल और अंचल संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दे सके जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले लंबित हों । हमारी सरकार ने ऐसे मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु छ: विशेष न्यायालयों का गठन किया है । मुझे बस इसी वक्त का बेसब्री से इंतजार था । ज्योंहि उक्त भवन में बच्चों की पढ़ाई शुरू हुई, मैंने आपसे अपने विचार साझा करने का निर्णय लिया ।
इस भवन में विद्यालय खुलना एक साधारण घटना कतई नहीं है । ऐसा दरअसल देश में पहली बार हुआ है । यह न सिर्फ हमारी सरकार कि भ्रष्टाचार को मिटाने की प्रतिबद्वता का नतीजा है वरण उस उद्देश्य की प्राप्ित हेतु एक व्यावहारिक कदम भी है ।
भ्रष्टाचार उन्मूलन हेतु लाये गये इस कानून के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य यह है इससे भ्रष्ट लोक सेवकों के मन में कानून का भय पैदा हो । मेरा मानना है कि संपत्तियों के जब्त करने का प्रावधान लोक सेवकों में गैरकानूनी तरीकों से धन अर्जित करने की प्रवृति को दूर करने में कारगर सिद्व होंगे । उन्हें जब यह महसूस होगा कि इन भ्रष्ट तरीकों से धन अर्जित करने का क्या हश्र होता है तो ऐसे आचारण से परहेज करने लगेंगे ।
उक्त कानून के लागू होने के पूर्व लोक सेवकों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमों के निष्पादन में वर्षो लग जाते थे । इसके आरोपी अपनी गैरकानूनी तरीके से अर्जित धन की बदौलत बेहतरीन वकीलों की सेवा मुकदमों की पैरवी के लिये हासिल करते थे । पूर्व के कानूनों में मुकदमों के लंबित होने की अवधि में आरोपी की संपत्ति जब्त करने का भी कोई प्रावधान नहीं था ।
भ्रष्ट लोक सेवकों की संपत्ति जब्त करने का प्रयास इस कानून के अंतर्गत विशेष न्यायलयों की स्थापना के बाद ही शुरू हो गये थे किन्तु कानूनी प्रक्रिया के कारण इसके अनुपालन में कुछ विलम्ब हुआ । जब विशेष न्यायालयों ने कुछ आरोपियों की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया तो उनमें से कुछ ने उक्त आदेश को ऊंची अदालतों में चुनौती दी । अंतत: पटना उच्च न्यायालय ने इस कानून की वैधता को सही ठहराया जिससे आरोपितों के भवनों में विद्यालयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ ।
इस घटना से उन सभी लोक सेवकों को सचेत हो जाना चाहिये जिन्होंने भ्रष्ट तरीकों से अकूत संपत्ति अर्जित की है । अगले कुछ महीनों में, इस तरह के अनेक भवनों को जब्त किया जायेगा और वहॉं विद्यालय, रात्रि विश्राम गृह और जनता की जरूरतों से जुड़े किसी केन्द्र की स्थापना की जायेगी ।
यहॉं मैं लोक सेवक के बारे में भ्रांतियों को दूर करना चाहूँगा । मेरे विचार से लोक सेवकों की भूमिका का निर्धारण उनके द्वारा आम लोगों के लिये निर्धारित कार्यों के स्वरूप एवं जिम्मेदारियों के आलोक में होना चाहिये । इस संदर्भ में तमाम जनता के प्रतिनिधि जैसे सांसद, विधायक, मंत्री के साथ-साथ तमाम सरकारी पदाधिकारी भी लोक सेवकों के दायरे में आते हैं ।
गत विधानसभा चुनाव के दौरान मैंने बिहार के लोगों से यह वादा किया था कि मैं भ्रष्ट लोक सेवकों के घर में विद्यालयों की स्थापना करूँगा । जब पिछले सप्ताह इसे मूर्त्त रूप दिया गया तो मुझे अहसास हुआ कि मैंने अपना वादा पूरा किया ।
लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार उन्मूलन हेतु चुनाव जीतने के पश्चात कोई अन्य प्रयास नहीं किये । इस दौरान हमने भ्रष्टाचार खत्म करने एवं लालफीताशाही को कम करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये । सर्वप्रथम मैंने बिहार सरकार के तमाम मंत्रियों समेत अपनी संपत्तियों का ब्योरा सरकारी वेबसाइट पर अपलोड करा दिया । इसके पश्चात तमाम सरकारी अधिकारी एवं वर्ग-3 तक के कर्मचारीयों ने भी अपनी संपत्तियों का ब्यौरा वेबसाइट पर अपलोड किया ।
हमारी सरकार ने यह भी निर्णय लिया कि विधायकों के विवादास्पद स्थानीय विधायक कोष को भी समाप्त किया जाये और इसके स्थान पर एक पारदर्शी व्यवस्था लायी जाये जिसमें स्थानीय विधायकों की भागीदारी सुनिश्िचत कर राज्य के चहुमुखी विकाश के लक्ष्य की प्राप्ित की जा सके ।
पिछले कुछ वर्षों में बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान मुझे लोगों से जमीनी स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायतें व्यापक पैमाने पर प्राप्त हुई । उन्होंने कहा कि उन्हें जाति एवं आय प्रमाण पत्र से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस एवं पासपोर्ट हेतु पुलिस सत्यापन जैसे छोटे कार्यों के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है ।
इसे नियंत्रित करने के लिये पिछले माह हमारी सरकार ने ''राइट टू पब्िलक सर्विस ऐक्ट'' राज्य में लागू किया, जिसके अंतर्गत जन सेवाओं से जुड़े कार्यों का एक निर्धारित समय-सीमा के अंदर निष्पादन की व्यवस्था है । इस कानून के अंतर्गत, जिसे पिछले स्वतंत्रता दिवस से लागू किया गया है, सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लोगों के आवेदन निर्धारित समय-सीमा के अंदर निष्पादित करने पड़ेंगे अन्यथा उन्हें जुर्माना भरना पड़ेगा । मेरा उद्देश्य यह है कि लोगों को इन कार्यों के लिये तो रिश्वत न देनी पड़े और न ही सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना पड़े । आमलोगों को बस आवेदन देना पड़ेगा और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों के निष्पादन का इंतजार करना पड़ेगा ।
अब हमारी सरकार ने लोकायुक्त की संस्था को बिहार में अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये हैं । बिहार में 1973 से ही लोकयुक्त की व्यवस्था है किन्तु मुझे लगता है इस संस्था के अधिकारों को व्यापक बनाने की आवश्यकता है । मैं इस पक्ष में भी हूँ कि मुख्यमंत्री को इस कानून के दायरे में लाने की जरूरत है । हमारी सरकार इस कानून से संबंधित संशोधित बिल को विधानमंडल के आगामी सत्र में पेश करेगी ।
ये ऐसे कुछ कदम हैं जिसे हमारी सरकार ने पिछले कुछ महीनों में उठाये हैं । मैं आपको आश्वस्त करना चाहूँगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई भविष्य में भी जारी रहेगी । हाल के दिनों में देश के विभिन्न भागों में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिमों को व्यापक जन समर्थन प्राप्त हुआ है । यह साबित करता है कि आमलोगों में इस बात का क्षोभ हैं कि भ्रष्टाचार ने जन जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पैठ बना ली है ।
इसीलिए मुझे लगता है कि भ्रष्टाचार-उन्मूलन हेतु प्रभावी कानूनों की आवश्यकता आज पहले की अपेक्षा अधिक है । भ्रष्ट लोक सेवकों की संपत्तियों को जब्त करना इस दिशा में उठाया गया एक छोटा किन्तु प्रभावशाली कदम है । इससे लोगों में व्यवस्था के प्रति पुन: आस्था जगेगी, कानून-व्यवस्था पालन कराने वाली संस्थाओं को प्रेरित करेगी एवं भ्रष्ट लोगों को गैरकानूनी ढंग से धन अर्जित करने से दूर रखेगी । अगर हमें भ्रष्टाचार को समूल उखाड़ना है तो हमें हर जगह ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे ।
अत: में, मैं दो अन्य बातों का संक्षेप में जिक्र करना चाहूँगा । मुझे यह बताते हुये हर्ष हो रहा है कि मुख्यमंत्री साईकिल योजना के अंतर्गत छ: लाख से अधिक विद्यार्थी जिसमें 2.25 लाख लड़के हैं, इस वर्ष लाभान्िवत हुए हैं । यह योजना पूर्व में सिर्फ लड़कियों के लिये शुरू की गयी थी, किन्तु बाद में इसे लड़कों के लिये भी लागू किया गया । शुरूआत में इस योजना के अंतर्गत सिर्फ 1.50 लाख लड़कियों को साईकिल खरीदने हेतु राशि दी गयी थी, किन्तु अब उनकी संख्या 3.75 लाख से ऊपर पहूँच गयी है ।
मैं यहॉं राज्य में चलाये जा रहे 'हरित बिहार' अभियान का भी जिक्र करना चाहूँगा । इस अभियान के अंतर्गत हमारी सरकार और पार्टी ने वृक्षारोपण पर बल दिया है ताकि हम राज्य में कम से कम 15 प्रतिशत वन क्षेत्र के लक्ष्य को प्राप्त कर सकें । हमने न सिर्फ वृक्षारोपण की शुरूआत की है बल्िक पौधों की सुरक्षा हेतु भी आवश्यक कदम उठाये हैं ताकि वे वृक्षों में परिणत हो सकें । मुझे लगता है कि समय आ गया है कि हमारी नयी पीढ़ी पर्यावरण की सुरक्षा हेतु अपनी प्रतिबद्वता दिखाये ।
शुभकामनाओं के साथ
आपके सुझावों के इंतजार में,
नीतीश कुमार
सबसे पहले बिहारवासियों को धन्यवाद देना चाहूँगा, जिन्होंने हमारी सरकार को खुले दिल से बेमिसाल समर्थन दिया और अपनी निष्ठा व्यक्त की ।
बिगत कुछ महिनों में दुनियॉं के विभिन्न कोने से लोगों ने यह जिज्ञासा प्रकट की मैंने ब्लॉग लेखन को विराम क्यों दे दिया । दरअसल मैंने ब्लॉग लिखना बंद नहीं किया था । मैं तो उस महत्वपूर्ण क्षण का इंतजार कर रहा था जब किसी ठोस मुद्दा और विषय के साथ आपके समक्ष आऊं । मैं समझता हूँ वह मौका आ गया है ।
बिगत सप्ताह हमारी सरकार ने एक ऐसे मुकाम को हासिल किया जिसके लिये में मैं प्रतिबद्व था । हमारी सरकार ने एक ऐसे वरीय लोक सेवक के घर में एक प्राथमिक विद्यालय की शुरूआत की, जिनपर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मुकदमा चल रहा है । हमारी सरकार ने उक्त भवन में उस प्राथमिक विद्यालय का स्थानांतरण किया जहॉं गरीब एवं वंचित समाज के बच्चे पढ़ते थे ।
इस भवन का बिहार विशेष न्यायालय कानून के अंतर्गत अधिग्रहण किया गया था जिसे हमारी सरकार ने पिछले वर्ष से लागू किया था । इस भवन को पटना जिला प्रशासन ने विशेष न्यायालय जो भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की सुनवाई कर रही है, के निर्देश पर हाल ही में जब्त किया है और इसे मानव संसाधन विभाग को सुर्पुद किया गया जिसने अल्प अवधि में ही वहॉं प्राथिमक विद्यालय की शुरूआत की ।
इस कानून के अंतर्गत संबंधित प्राधिकार को यह अधिकार है कि वह किसी ऐसे लोक सेवक की चल और अंचल संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दे सके जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले लंबित हों । हमारी सरकार ने ऐसे मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु छ: विशेष न्यायालयों का गठन किया है । मुझे बस इसी वक्त का बेसब्री से इंतजार था । ज्योंहि उक्त भवन में बच्चों की पढ़ाई शुरू हुई, मैंने आपसे अपने विचार साझा करने का निर्णय लिया ।
इस भवन में विद्यालय खुलना एक साधारण घटना कतई नहीं है । ऐसा दरअसल देश में पहली बार हुआ है । यह न सिर्फ हमारी सरकार कि भ्रष्टाचार को मिटाने की प्रतिबद्वता का नतीजा है वरण उस उद्देश्य की प्राप्ित हेतु एक व्यावहारिक कदम भी है ।
भ्रष्टाचार उन्मूलन हेतु लाये गये इस कानून के पीछे मेरा मुख्य उद्देश्य यह है इससे भ्रष्ट लोक सेवकों के मन में कानून का भय पैदा हो । मेरा मानना है कि संपत्तियों के जब्त करने का प्रावधान लोक सेवकों में गैरकानूनी तरीकों से धन अर्जित करने की प्रवृति को दूर करने में कारगर सिद्व होंगे । उन्हें जब यह महसूस होगा कि इन भ्रष्ट तरीकों से धन अर्जित करने का क्या हश्र होता है तो ऐसे आचारण से परहेज करने लगेंगे ।
उक्त कानून के लागू होने के पूर्व लोक सेवकों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमों के निष्पादन में वर्षो लग जाते थे । इसके आरोपी अपनी गैरकानूनी तरीके से अर्जित धन की बदौलत बेहतरीन वकीलों की सेवा मुकदमों की पैरवी के लिये हासिल करते थे । पूर्व के कानूनों में मुकदमों के लंबित होने की अवधि में आरोपी की संपत्ति जब्त करने का भी कोई प्रावधान नहीं था ।
भ्रष्ट लोक सेवकों की संपत्ति जब्त करने का प्रयास इस कानून के अंतर्गत विशेष न्यायलयों की स्थापना के बाद ही शुरू हो गये थे किन्तु कानूनी प्रक्रिया के कारण इसके अनुपालन में कुछ विलम्ब हुआ । जब विशेष न्यायालयों ने कुछ आरोपियों की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया तो उनमें से कुछ ने उक्त आदेश को ऊंची अदालतों में चुनौती दी । अंतत: पटना उच्च न्यायालय ने इस कानून की वैधता को सही ठहराया जिससे आरोपितों के भवनों में विद्यालयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ ।
इस घटना से उन सभी लोक सेवकों को सचेत हो जाना चाहिये जिन्होंने भ्रष्ट तरीकों से अकूत संपत्ति अर्जित की है । अगले कुछ महीनों में, इस तरह के अनेक भवनों को जब्त किया जायेगा और वहॉं विद्यालय, रात्रि विश्राम गृह और जनता की जरूरतों से जुड़े किसी केन्द्र की स्थापना की जायेगी ।
यहॉं मैं लोक सेवक के बारे में भ्रांतियों को दूर करना चाहूँगा । मेरे विचार से लोक सेवकों की भूमिका का निर्धारण उनके द्वारा आम लोगों के लिये निर्धारित कार्यों के स्वरूप एवं जिम्मेदारियों के आलोक में होना चाहिये । इस संदर्भ में तमाम जनता के प्रतिनिधि जैसे सांसद, विधायक, मंत्री के साथ-साथ तमाम सरकारी पदाधिकारी भी लोक सेवकों के दायरे में आते हैं ।
गत विधानसभा चुनाव के दौरान मैंने बिहार के लोगों से यह वादा किया था कि मैं भ्रष्ट लोक सेवकों के घर में विद्यालयों की स्थापना करूँगा । जब पिछले सप्ताह इसे मूर्त्त रूप दिया गया तो मुझे अहसास हुआ कि मैंने अपना वादा पूरा किया ।
लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार उन्मूलन हेतु चुनाव जीतने के पश्चात कोई अन्य प्रयास नहीं किये । इस दौरान हमने भ्रष्टाचार खत्म करने एवं लालफीताशाही को कम करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये । सर्वप्रथम मैंने बिहार सरकार के तमाम मंत्रियों समेत अपनी संपत्तियों का ब्योरा सरकारी वेबसाइट पर अपलोड करा दिया । इसके पश्चात तमाम सरकारी अधिकारी एवं वर्ग-3 तक के कर्मचारीयों ने भी अपनी संपत्तियों का ब्यौरा वेबसाइट पर अपलोड किया ।
हमारी सरकार ने यह भी निर्णय लिया कि विधायकों के विवादास्पद स्थानीय विधायक कोष को भी समाप्त किया जाये और इसके स्थान पर एक पारदर्शी व्यवस्था लायी जाये जिसमें स्थानीय विधायकों की भागीदारी सुनिश्िचत कर राज्य के चहुमुखी विकाश के लक्ष्य की प्राप्ित की जा सके ।
पिछले कुछ वर्षों में बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान मुझे लोगों से जमीनी स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायतें व्यापक पैमाने पर प्राप्त हुई । उन्होंने कहा कि उन्हें जाति एवं आय प्रमाण पत्र से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस एवं पासपोर्ट हेतु पुलिस सत्यापन जैसे छोटे कार्यों के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है ।
इसे नियंत्रित करने के लिये पिछले माह हमारी सरकार ने ''राइट टू पब्िलक सर्विस ऐक्ट'' राज्य में लागू किया, जिसके अंतर्गत जन सेवाओं से जुड़े कार्यों का एक निर्धारित समय-सीमा के अंदर निष्पादन की व्यवस्था है । इस कानून के अंतर्गत, जिसे पिछले स्वतंत्रता दिवस से लागू किया गया है, सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लोगों के आवेदन निर्धारित समय-सीमा के अंदर निष्पादित करने पड़ेंगे अन्यथा उन्हें जुर्माना भरना पड़ेगा । मेरा उद्देश्य यह है कि लोगों को इन कार्यों के लिये तो रिश्वत न देनी पड़े और न ही सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना पड़े । आमलोगों को बस आवेदन देना पड़ेगा और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यों के निष्पादन का इंतजार करना पड़ेगा ।
अब हमारी सरकार ने लोकायुक्त की संस्था को बिहार में अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये हैं । बिहार में 1973 से ही लोकयुक्त की व्यवस्था है किन्तु मुझे लगता है इस संस्था के अधिकारों को व्यापक बनाने की आवश्यकता है । मैं इस पक्ष में भी हूँ कि मुख्यमंत्री को इस कानून के दायरे में लाने की जरूरत है । हमारी सरकार इस कानून से संबंधित संशोधित बिल को विधानमंडल के आगामी सत्र में पेश करेगी ।
ये ऐसे कुछ कदम हैं जिसे हमारी सरकार ने पिछले कुछ महीनों में उठाये हैं । मैं आपको आश्वस्त करना चाहूँगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई भविष्य में भी जारी रहेगी । हाल के दिनों में देश के विभिन्न भागों में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिमों को व्यापक जन समर्थन प्राप्त हुआ है । यह साबित करता है कि आमलोगों में इस बात का क्षोभ हैं कि भ्रष्टाचार ने जन जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पैठ बना ली है ।
इसीलिए मुझे लगता है कि भ्रष्टाचार-उन्मूलन हेतु प्रभावी कानूनों की आवश्यकता आज पहले की अपेक्षा अधिक है । भ्रष्ट लोक सेवकों की संपत्तियों को जब्त करना इस दिशा में उठाया गया एक छोटा किन्तु प्रभावशाली कदम है । इससे लोगों में व्यवस्था के प्रति पुन: आस्था जगेगी, कानून-व्यवस्था पालन कराने वाली संस्थाओं को प्रेरित करेगी एवं भ्रष्ट लोगों को गैरकानूनी ढंग से धन अर्जित करने से दूर रखेगी । अगर हमें भ्रष्टाचार को समूल उखाड़ना है तो हमें हर जगह ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे ।
अत: में, मैं दो अन्य बातों का संक्षेप में जिक्र करना चाहूँगा । मुझे यह बताते हुये हर्ष हो रहा है कि मुख्यमंत्री साईकिल योजना के अंतर्गत छ: लाख से अधिक विद्यार्थी जिसमें 2.25 लाख लड़के हैं, इस वर्ष लाभान्िवत हुए हैं । यह योजना पूर्व में सिर्फ लड़कियों के लिये शुरू की गयी थी, किन्तु बाद में इसे लड़कों के लिये भी लागू किया गया । शुरूआत में इस योजना के अंतर्गत सिर्फ 1.50 लाख लड़कियों को साईकिल खरीदने हेतु राशि दी गयी थी, किन्तु अब उनकी संख्या 3.75 लाख से ऊपर पहूँच गयी है ।
मैं यहॉं राज्य में चलाये जा रहे 'हरित बिहार' अभियान का भी जिक्र करना चाहूँगा । इस अभियान के अंतर्गत हमारी सरकार और पार्टी ने वृक्षारोपण पर बल दिया है ताकि हम राज्य में कम से कम 15 प्रतिशत वन क्षेत्र के लक्ष्य को प्राप्त कर सकें । हमने न सिर्फ वृक्षारोपण की शुरूआत की है बल्िक पौधों की सुरक्षा हेतु भी आवश्यक कदम उठाये हैं ताकि वे वृक्षों में परिणत हो सकें । मुझे लगता है कि समय आ गया है कि हमारी नयी पीढ़ी पर्यावरण की सुरक्षा हेतु अपनी प्रतिबद्वता दिखाये ।
शुभकामनाओं के साथ
आपके सुझावों के इंतजार में,
नीतीश कुमार





